
2025 में भारतीय बैडमिंटन को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। खिलाड़ियों की चोटें और बड़े टूर्नामेंटों में लगातार अच्छा प्रदर्शन न कर पाना बड़ी समस्या रही। फिर भी, कुछ अच्छी खबरों ने उम्मीद बनाए रखी। लक्ष्य सेन की खिताबी जीत, सत्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक, और युवा खिलाड़ियों का उभरना इस साल की खास बातें रहीं।
साल भर फिटनेस की दिक्कतों के कारण कई सीनियर खिलाड़ियों की तैयारी और लय बिगड़ी रही। इसी वजह से यह साल आगे बढ़ने से ज्यादा खुद को परखने और सुधारने का रहा।
नवंबर में ऑस्ट्रेलियन ओपन सुपर 500 जीतना लक्ष्य सेन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पेरिस ओलंपिक में चौथे स्थान के बाद यह जीत उनके लिए आत्मविश्वास लौटने जैसी थी। यह 2023 कनाडा ओपन के बाद उनकी पहली सुपर 500 जीत थी। हालांकि, वह हांगकांग ओपन में उपविजेता रहकर एक और खिताब से चूक गए।
बीमारी और चोटों के बावजूद सत्विकसाईराज और चिराग ने पुरुष युगल में भारत की शान बनाए रखी। उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और हांगकांग ओपन व चाइना मास्टर्स के फाइनल तक पहुंचे। साथ ही, वे वर्ल्ड टूर फाइनल्स के एलिमिनेशन राउंड तक पहुंचने वाली पहली भारतीय पुरुष जोड़ी बने।
किदांबी श्रीकांत ने भी कुछ अच्छे प्रदर्शन किए, लेकिन खिताब जीतने में नाकाम रहे। मलेशिया मास्टर्स और सैयद मोदी इंटरनेशनल में वह फाइनल तक पहुंचे, पर ट्रॉफी नहीं जीत सके।
महिला युगल में गायत्री गोपीचंद और ट्रीसा जॉली ने सैयद मोदी इंटरनेशनल का खिताब बचाकर अच्छा प्रदर्शन किया।
सबसे अच्छी खबर युवा खिलाड़ियों से आई। 20 साल के आयुष शेट्टी ने यूएस ओपन सुपर 300 जीतकर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को हराकर दिखाया कि वह भविष्य के स्टार बन सकते हैं।
16 साल की तन्वी शर्मा ने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। उन्होंने सैयद मोदी इंटरनेशनल में पूर्व विश्व नंबर-1 नोज़ोमी ओकुहारा को हराकर बड़ी जीत दर्ज की और गुवाहाटी मास्टर्स में उपविजेता रहीं।
उन्नति हुड्डा ने भी शानदार प्रगति की। उन्होंने ओडिशा मास्टर्स सुपर 100 जीता और विश्व रैंकिंग में 23वें स्थान तक पहुंचीं। चाइना मास्टर्स में पीवी सिंधु को हराना उनकी बड़ी उपलब्धि रही।
संस्कार सरस्वत की गुवाहाटी मास्टर्स में सुपर 100 जीत ने यह दिखाया कि भारत में नई प्रतिभाओं की कमी नहीं है।
हालांकि, सीनियर खिलाड़ियों के लिए साल मुश्किल रहा। पीवी सिंधु चोटों से जूझती रहीं और कई टूर्नामेंटों में जल्दी बाहर हो गईं। एचएस प्रणय का सीजन भी चोट और बीमारी के कारण खराब रहा और वह लगातार शुरुआती दौर में हारते रहे।
कुल मिलाकर, 2025 भारतीय बैडमिंटन के लिए आसान नहीं था। लेकिन युवा खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि आने वाले सालों में भारतीय बैडमिंटन फिर से मजबूती से उभर सकता है।








