
इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने हाल ही में खत्म हुए बॉक्सिंग डे टेस्ट में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) की बेहद गेंदबाज़ों के अनुकूल पिच की कड़ी आलोचना की। इस टेस्ट के पहले ही दिन 20 विकेट गिरे थे। स्टोक्स का कहना है कि अगर ऐसी पिच दुनिया के किसी और हिस्से में होती, तो इसकी ज़ोरदार निंदा होती।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिनेश कार्तिक और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन भी स्टोक्स के समर्थन में सामने आए। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि जब भारत में स्पिनरों को मदद मिलती है तो पिचों की आलोचना क्यों होती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों पर तेज़ गेंदबाज़ों के लिए मददगार पिचों पर वही प्रतिक्रिया नहीं दिखती।
हालांकि इंग्लैंड ने यह टेस्ट चार विकेट से जीत लिया, लेकिन स्टोक्स ने साफ कहा कि यह बॉक्सिंग डे टेस्ट जैसी बड़ी प्रतियोगिता के लिए सही पिच नहीं थी।
स्टोक्स ने मैच के बाद मीडिया से कहा, “ईमानदारी से कहूं तो बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए यह वैसी पिच नहीं होनी चाहिए। आप नहीं चाहते कि टेस्ट मैच दो दिन से भी कम में खत्म हो जाए। यह आदर्श स्थिति नहीं है। लेकिन मैच शुरू होने के बाद आप पिच नहीं बदल सकते, आपको जैसी स्थिति है वैसा ही खेलना पड़ता है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर इतनी जल्दी विकेट गिरने का सिलसिला दुनिया के किसी और देश में होता, तो हंगामा मच जाता।
“अगर ऐसा कहीं और हुआ होता, तो ज़बरदस्त विरोध होता। टेस्ट क्रिकेट पाँच दिनों के लिए होता है, और यह उसके लिए अच्छा नहीं है।”
जब उनसे सीधे पूछा गया कि क्या उनका इशारा एशिया की स्पिन-अनुकूल पिचों की ओर है, तो उन्होंने मज़ाक में कहा, “ये आपके शब्द हैं, मेरे नहीं।”
शनिवार को ऑस्ट्रेलिया दूसरी पारी में सिर्फ 132 रन पर ढेर हो गया, और शुक्रवार को दोनों टीमों के गेंदबाज़ों ने मिलकर 20 विकेट चटका दिए थे।
केविन पीटरसन ने भी इस दोहरे मापदंड पर सवाल उठाया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “भारत में अगर टेस्ट के पहले दिन इतने विकेट गिरते हैं, तो हमेशा उसकी आलोचना होती है। उम्मीद है कि अब ऑस्ट्रेलिया को भी वही जांच-पड़ताल झेलनी पड़ेगी। न्याय होना चाहिए।”
MCG की पिच पर 10 मिलीमीटर घास छोड़ी गई थी, जिससे गेंद को ज़बरदस्त स्विंग और सीम मूवमेंट मिली और बल्लेबाज़ी पूरी तरह किस्मत का खेल बन गई।
यह चौथा टेस्ट सिर्फ दो दिन में खत्म हो गया, जिसमें छह सत्रों में कुल 36 विकेट गिरे और इंग्लैंड ने चार विकेट से जीत दर्ज की।
ऑस्ट्रेलिया के कार्यवाहक कप्तान स्टीव स्मिथ ने भी माना कि पिच ने “कुछ ज़्यादा ही मदद” दी।
उन्होंने कहा, “दो दिन में 36 विकेट गिरना बताता है कि पिच ने थोड़ा ज़्यादा ही किया। पिछले साल की पिच शानदार थी, मैच पाँचवें दिन तक गया था। अगर घास 10 की बजाय 8 मिलीमीटर होती, तो शायद पिच ज़्यादा संतुलित रहती।”
दिनेश कार्तिक ने भी नाराज़गी जताते हुए लिखा, “MCG ने बेहद साधारण पिच बनाई है। यकीन नहीं होता कि चार में से दो एशेज टेस्ट सिर्फ दो दिन में खत्म हो गए। इतनी चर्चा के बावजूद चार टेस्ट सिर्फ 13 दिनों में निपट गए।”
यह बयान उस आलोचना के संदर्भ में आए हैं, जो अक्सर भारत और उपमहाद्वीप की पिचों को लेकर होती है।
2020–21 में अहमदाबाद और चेन्नई में जब भारतीय स्पिनरों अक्षर पटेल और रविचंद्रन अश्विन ने इंग्लैंड को परेशान किया था, तब ज़बरदस्त आलोचना हुई थी।
इसके उलट, मौजूदा एशेज में ऑस्ट्रेलिया की तेज़ गेंदबाज़ी के अनुकूल पिचों पर वैसी नाराज़गी कम देखने को मिली।
पूर्व भारतीय ओपनर आकाश चोपड़ा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “यह पिच मज़ाक है। यह खेल के साथ नाइंसाफी है। 98 ओवर में 26 विकेट गिर गए। डेढ़ दिन में एक भी ओवर स्पिन नहीं डाला गया। अगर ऐसा उपमहाद्वीप में होता, तो सोचिए क्या बवाल मचता।”
हकीकत यह रही कि चौथे टेस्ट में न ऑस्ट्रेलिया और न ही इंग्लैंड ने कोई विशेषज्ञ स्पिनर खिलाया। यहां तक कि पार्ट-टाइम गेंदबाज़ों जैसे विल जैक्स या ट्रैविस हेड से भी गेंदबाज़ी नहीं करवाई गई।








