2025: भारतीय बॉक्सिंग के लिए उतार-चढ़ाव भरा साल!

2025 भारतीय बॉक्सिंग के लिए काफी मुश्किलों और बदलावों से भरा साल रहा। एक तरफ खेल प्रशासन में झगड़े, कोर्ट-कचहरी और अंदरूनी विवाद चलते रहे, तो दूसरी तरफ जैसमीन लाम्बोरिया और मीनाक्षी हुड्डा जैसी नई विश्व चैंपियन उभरकर सामने आईं, जिन्होंने देश को गर्व करने का मौका दिया।

ओलंपिक में कोई पदक न मिलने के बाद भारतीय मुक्केबाज़ों ने साल की शुरुआत में ज़्यादातर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं खेले। इससे साल की शुरुआत फीकी रही। इसी दौरान भारतीय मुक्केबाज़ी महासंघ (BFI) के भीतर भारी खींचतान शुरू हो गई, जिसका असर सीधे खिलाड़ियों पर पड़ा।

महासंघ के अलग-अलग गुट आपस में भिड़ते रहे। नतीजा यह हुआ कि टीम चयन रुक गया, राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ टलती रहीं, कोचिंग पद खाली रहे और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का मौका नहीं मिल पाया।

इस पूरे विवाद की जड़ BFI के चुनाव थे, जो फरवरी में होने थे लेकिन बार-बार टलते रहे। हालात बिगड़ने पर भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने एक अस्थायी समिति बनाई, लेकिन BFI इसे लेकर कोर्ट चला गया और मामला और उलझ गया।

इस बीच वित्तीय गड़बड़ियों और सत्ता के दुरुपयोग के आरोप लगे। BFI अध्यक्ष अजय सिंह ने कोषाध्यक्ष और महासचिव को हटा दिया, जिसके बाद कानूनी लड़ाइयाँ और तेज़ हो गईं। पूर्व खेल मंत्री अनुराग ठाकुर भी अध्यक्ष पद की दौड़ में आए, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया। कई राज्य संघ इस फैसले के खिलाफ कोर्ट पहुँच गए।

हालात इतने खराब हो गए कि चुनाव कराने वाले अधिकारी ने भी इस्तीफा दे दिया। इस पूरे विवाद का सबसे ज़्यादा नुकसान खिलाड़ियों को हुआ। कई बॉक्सर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सके। असम की ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोर्गोहैन तक को अपना नाम वापस लेना पड़ा।

जब चुनाव लगातार टलते रहे, तब अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्ड बॉक्सिंग ने हस्तक्षेप किया और अजय सिंह को अंतरिम प्रमुख बनाया। आखिरकार अगस्त में अजय सिंह फिर से अध्यक्ष चुने गए, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

इसके बाद जब ध्यान फिर से खेल पर गया, तो हालात थोड़े सुधरे। नए राष्ट्रीय कोच नियुक्त हुए और भारतीय टीम ने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में ठीक-ठाक प्रदर्शन किया। साल का सबसे बड़ा पल तब आया जब लिवरपूल में हुई विश्व चैंपियनशिप में जैसमीन लाम्बोरिया और मीनाक्षी हुड्डा ने स्वर्ण पदक जीते।

महिला बॉक्सिंग में भारत की ताकत साफ दिखी। पूजा रानी ने कांस्य और नुपुर श्योरन ने रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। हालांकि, कुछ बड़े नाम जैसे लवलीना बोर्गोहैन और निकहत ज़रीन उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं।

जैसमीन लाम्बोरिया ने खास तौर पर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप फाइनल में पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता पोलैंड की बॉक्सर को हराया। अब उन्हें 2028 ओलंपिक की मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

पुरुष टीम का प्रदर्शन उतना अच्छा नहीं रहा। 12 साल बाद पहली बार वे विश्व चैंपियनशिप से बिना पदक लौटे। फिर भी अभिनाश जामवाल, सचिन सिवाच और पवन बर्तवाल जैसे युवा खिलाड़ियों ने उम्मीद जगाई।

साल के अंत में भारत में हुए वर्ल्ड कप फाइनल्स में भारत ने रिकॉर्ड 20 पदक जीते, हालांकि इसमें पूरी दुनिया के टॉप खिलाड़ी शामिल नहीं थे।

साल के खत्म होते-होते एक नई शुरुआत की उम्मीद जगी, जब पूर्व हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर सैंटियागो निएवा को महिला टीम का मुख्य कोच बनाया गया।

कुल मिलाकर, 2025 भारतीय बॉक्सिंग के लिए संघर्ष, विवाद और सफलता—तीनों का मिला-जुला साल रहा। जहां प्रशासनिक परेशानियाँ रहीं, वहीं नए चैंपियनों ने भविष्य के लिए उम्मीद भी जगाई।