पाकिस्तान के चयनकर्ताओ ने क्रिकेट रीडेवलपमेंट के लिए भारत के ब्लूप्रिंट को क्यों अपनाया!

पाकिस्तान की नेशनल क्रिकेट अकादमी के प्रमुख और सीनियर चयनकर्ता आकिब जावेद ने खुलासा किया है कि उन्होंने भारत की सफलता की कहानी का अध्ययन किया है और उसी से प्रेरणा लेकर अपने देश में क्रिकेट को बेहतर बनाने की कोशिश की है।

भारत हाल के वर्षों में व्हाइट-बॉल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर रहा है। टीम ने सितंबर में पाकिस्तान को फाइनल में हराकर एशिया कप जीता, इस साल की शुरुआत में दुबई में चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की और पिछले साल कैरेबियन में टी20 विश्व कप भी जीता।

आकिब जावेद ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के एक पॉडकास्ट में कहा, “मैंने भारत की सफलता को देखा है और पाकिस्तान क्रिकेट की बेहतरी के लिए उन्हीं योजनाओं को लागू करने की कोशिश की है। किसी भी क्रिकेट देश की सफलता उसके टैलेंट की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।”

पूर्व तेज गेंदबाज आकिब ने 2006 में भारत के पाकिस्तान दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय भारतीय टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने लाहौर के एलसीसीए ग्राउंड को देखने की इच्छा जताई थी, जिसे उस दौर में क्षेत्र की बेहतरीन सुविधाओं और अकादमियों में गिना जाता था।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम अपने क्रिकेट सिस्टम में बुनियादी चीजें सही ढंग से करने में पीछे रह गए। आप चाहे किसी को भी कप्तान, कोच या चयनकर्ता बना दें, जब तक आपके पास गुणवत्ता वाला टैलेंट नहीं होगा, कुछ नहीं बदलेगा। और टैलेंट की गुणवत्ता तभी सुनिश्चित होती है जब बेंच स्ट्रेंथ और प्रतिस्पर्धा बढ़े, जो कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सही सिस्टम से ही संभव है।”

हाल ही तक पाकिस्तान टीम के अंतरिम मुख्य कोच रहे आकिब ने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि पाकिस्तान क्रिकेट अब सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।

आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों और अगले साल की शुरुआत में भारत और श्रीलंका में होने वाले टी20 विश्व कप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के लिए वैश्विक मंच पर प्रभाव छोड़ने का सही समय है।

उन्होंने कहा, “सारे संकेत सकारात्मक हैं। हमारे पास अच्छे खिलाड़ी हैं, वे एकजुट होकर खेल रहे हैं और सबसे अहम बात यह है कि अब हमारे पास खिलाड़ियों के विकल्प मौजूद हैं।”

आकिब के मुताबिक, आगामी विश्व कप में पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टीम अपने सभी मैच श्रीलंका में खेलेगी।

“अगर विश्व कप ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण अफ्रीका में होता, तो मैं अलग सोचता। लेकिन मौजूदा हालात में यह टीम के अच्छा करने का सबसे बेहतरीन मौका है।”

उन्होंने घरेलू क्रिकेट और पाकिस्तान शाहीन्स टीम से उभर रहे टैलेंट पर भी संतोष जताया और कहा कि तीन से चार खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

“आज के दौर में टैलेंट का मतलब सिर्फ कौशल नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती भी है। खिलाड़ी लगातार निगरानी में रहते हैं, वे खुलकर कहीं आ-जा भी नहीं सकते, उनके हर कदम पर नजर होती है। ऐसे में यह परखना जरूरी है कि कोई खिलाड़ी मानसिक रूप से कितना मजबूत है।”

आलोचना को लेकर आकिब जावेद ने कहा कि उन्हें इससे कोई डर नहीं लगता, क्योंकि वे खिलाड़ी, कप्तान, कोच और चयनकर्ता—हर भूमिका निभा चुके हैं।

उन्होंने कहा, “आलोचना खराब प्रदर्शन के बाद आती है, तो मुझे उससे क्या परेशानी होगी? आलोचना से ही सिस्टम में जवाबदेही आती है। हां, कभी-कभी आलोचना व्यक्तिगत हो जाती है और कुछ लोग हर चीज की आलोचना ही करना चाहते हैं। लेकिन जब टीम अच्छा करती है तो सभी खुश होते हैं और समर्थन करते हैं। फिर जब हम खराब खेलते हैं तो आलोचना स्वीकार क्यों न करें? आलोचना से बचने का सिर्फ एक ही तरीका है—अच्छा प्रदर्शन करना।”

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Manish Kumar
मनीष कुमार एक अनुभवी खेल पत्रकार हैं, जिन्हें खेल पत्रकारिता में 25 से ज़्यादा सालों का अनुभव है। वह खास तौर पर क्रिकेट के विशेषज्ञ माने जाते हैं, खासकर टेस्ट क्रिकेट जैसे लंबे और चुनौतीपूर्ण फॉर्मेट में। उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया ऑनलाइन के साथ करीब 16.5 साल तक काम किया, जहां उन्होंने बड़े क्रिकेट आयोजनों की कवरेज की और गहराई से विश्लेषण वाले लेख और उनकी भरोसेमंद राय पेश की। टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका जुनून उनकी लेखनी में साफ दिखाई देता है, जहां वह खेल की बारीकियों, रणनीतिक मुकाबलों और खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को सरल और स्पष्ट तरीके से समझाते हैं। मनीष अपनी तेज़ नज़र और डिटेल्स पर ध्यान देने के लिए जाने जाते हैं। आज भी वह क्रिकेट के रोमांच, जटिलताओं और कहानी को दुनिया भर के प्रशंसकों तक जीवंत अंदाज़ में पहुंचाते हैं।