क्या शुभमन गिल और गौतम गंभीर भारत की आदर्श घरेलू पिच को लेकर एक ही सोच रखते हैं?

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में भारत की 124 रन के छोटे लक्ष्य का पीछा करते हुए 30 रन की हार ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या कप्तान शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर घरेलू पिच को लेकर एक ही सोच रखते हैं?

ईडन गार्डन्स की सूखी, टूटती हुई पिच ने न सिर्फ बल्लेबाज़ों को परेशान किया बल्कि टीम मैनेजमेंट की सोच की खामियों को भी सामने ला दिया। कुछ ही हफ्ते पहले अहमदाबाद में, वेस्ट इंडीज़ सीरीज़ से ठीक पहले, गिल ने कहा था कि भारत अब “रैंक टर्नर्स” से हटकर बैलेंस्ड पिचों पर खेलना चाहता है—ऐसी जो बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ दोनों के लिए सही हों। लेकिन पहले टेस्ट की पिच इस सोच के ठीक उलट थी।

ईडन की पिच को लगभग एक हफ्ते तक पानी नहीं दिया गया था। नतीजा—पहले सत्र से टूटती, सूखी और ऊँची–नीची उछाल वाली विकेट। मैच सिर्फ आठ सत्र चला और 38 विकेट गिरे। गंभीर ने खुलकर कहा कि यही पिच टीम मैनेजमेंट ने मांगी थी। उनका कहना था कि विकेट में कोई दिक्कत नहीं थी, और हार बल्लेबाज़ी की नाकामी थी।
लेकिन राहुल, जिन्हें मार्को यानसन की उछलती गेंद ने मात दी, और मार्कराम, जिन्हें बुमराह की तेज़, अनियमित बाउंस मिली—दोनों गंभीर की राय से सहमत नहीं होंगे।

गिल दूसरी पारी में गर्दन की चोट के चलते मैदान पर नहीं उतरे। उनकी गैरमौजूदगी में भारतीय बल्लेबाज़ी बिल्कुल बिखरी दिखी—न खेल को पढ़ पाए, न हालात के हिसाब से ढल पाए।

भारत अपने पिछले छह में से चार घरेलू टेस्ट हार चुका है, और घर में अजेय रहने का भ्रम अब टूट रहा है। गंभीर के कार्यकाल में भारत ने 18 में से सिर्फ 8 टेस्ट जीते हैं, जिनमें से चार वेस्ट इंडीज़ और बांग्लादेश के खिलाफ थे। न्यूज़ीलैंड से पिछले साल घर में 0–3 की हार ने पहले ही यह दिखा दिया था कि टर्निंग पिचें भारत की ताकत नहीं, कमज़ोरी बनती जा रही हैं। ईडन की हार उसी कहानी को दोहराती है।

दिन दो के अंत तक भारत मैच पर पूरी पकड़ में था—दक्षिण अफ्रीका 93/7, यानी मात्र 63 रन आगे। लेकिन सुबह सबसे बड़ी गलती हुई—बुमराह को गेंद देने में देरी। सुबह की ठंडी हवा और ताज़ा पिच की स्थितियों में उन्हें पहला ओवर मिलना चाहिए था। इसके बजाय वे नौवें ओवर में आए। तब तक बवुमा टिक चुके थे, बॉश सेट हो चुके था, और लीड 100 के पार जा चुकी थी। अंत में बवुमा की 55 नाबाद पारी ने ही मैच का रुख बदल दिया।

ईडन की पिच को लेकर पूरे क्रिकेट जगत में बहस छिड़ गई। हरभजन सिंह ने यहाँ तक कहा— “टेस्ट क्रिकेट को मौत के घाट उतार दिया गया है।”

चेतेश्वर पुजारा ने साफ कहा – “घर में हार किसी भी बहाने से स्वीकार नहीं।”

गुवाहाटी टेस्ट के बाद भारत 2027 तक घर में टेस्ट नहीं खेलेगा।

इससे पहले उसे श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड के दौरे करने हैं—जहाँ मौजूदा हालात के आधार पर भारत की WTC मुहिम काफी मुश्किल दिखाई देती है।